अजमेर नगर निगम चुनाव से पहले शहर की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा दोनों के भीतर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। एक ओर कांग्रेस में टिकट वितरण और संगठन में कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा में पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत के पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
चुनावी माहौल के बीच स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, पानी और वार्डों के विकास जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं। वहीं दोनों प्रमुख दल अपने-अपने स्तर पर चुनावी रणनीति और संभावित उम्मीदवारों को लेकर तैयारियों में जुटे हुए हैं।
वीडियो में कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर कुछ नेताओं की नाराजगी का उल्लेख किया गया है। कांग्रेस नेताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं की राय लिए बिना कुछ फैसले किए जा रहे हैं। साथ ही चुनावी तैयारियों में सभी वर्गों और पुराने कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। :contentReference[oaicite:2]{index=2}
आगामी निगम चुनाव में निर्णय सभी की सहमति और भागीदारी से होने चाहिए तथा टिकट के साथ उम्मीदवार को जिताने की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
वीडियो में कांग्रेस नेता का बयान
कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर उठे सवाल
वीडियो में कांग्रेस नेताओं की ओर से कहा गया कि संगठन में ऐसे कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारियां दी गई हैं जिन्होंने लंबे समय तक बूथ या वार्ड स्तर पर काम नहीं किया। इसके विपरीत वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले पूर्व पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की राय को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने का आरोप लगाया गया। :contentReference[oaicite:3]{index=3}
कांग्रेस नेताओं ने आगामी नगर निगम चुनाव के लिए प्रदेश नेतृत्व से सभी पक्षों को साथ लेकर निर्णय लेने और जिम्मेदारियां स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना था कि टिकट वितरण में स्थानीय संगठन और पुराने कार्यकर्ताओं की भागीदारी महत्वपूर्ण होनी चाहिए। :contentReference[oaicite:4]{index=4}
धर्मेंद्र राठौड़ के हस्तक्षेप पर भी सवाल
वीडियो में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने धर्मेंद्र राठौड़ की अजमेर की राजनीति में भूमिका को लेकर भी आपत्ति जताई। नेताओं का आरोप है कि उनके हस्तक्षेप से स्थानीय कांग्रेस संगठन प्रभावित हुआ और पिछले निगम चुनाव में टिकट वितरण के फैसलों का पार्टी के प्रदर्शन पर असर पड़ा। हालांकि ये दावे संबंधित नेताओं के राजनीतिक आरोप हैं। :contentReference[oaicite:5]{index=5}
वहीं वीडियो में यह भी चर्चा की गई कि अजमेर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ने से संगठन को नुकसान हो सकता है। आने वाले निगम चुनाव में टिकट वितरण इस आंतरिक खींचतान को और प्रभावित कर सकता है।
भाजपा में धर्मेंद्र गहलोत के इस्तीफे से सियासत गरमाई
अजमेर की भाजपा राजनीति में उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें आगामी नागौर परिषद चुनाव के लिए चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वह यह जिम्मेदारी निभाने की स्थिति में नहीं हैं। :contentReference[oaicite:6]{index=6}
धर्मेंद्र गहलोत ने अपने बयान में बताया कि स्वायत्त शासन विभाग की ओर से उनके खिलाफ दो पुराने मामलों से संबंधित पत्र जारी हुए हैं। उनके अनुसार, इनमें एक मामला वर्ष 2021 का है और दूसरा उनके महापौर कार्यकाल से संबंधित पुराना प्रकरण है। उन्होंने इन मामलों के सामने आने की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। :contentReference[oaicite:7]{index=7}
जब तक संबंधित प्रकरणों का निस्तारण नहीं होता, तब तक पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना मेरी नैतिक जिम्मेदारी है।
धर्मेंद्र गहलोत
धर्मेंद्र गहलोत ने अपने बयान में भाजपा के वरिष्ठ नेता वासुदेव देवनानी के साथ अपने राजनीतिक मतभेदों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ जारी पत्रों के पीछे राजनीतिक दबाव की भूमिका हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि वीडियो के उपलब्ध subtitle में नहीं है। :contentReference[oaicite:8]{index=8}
उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके और देवनानी के बीच के राजनीतिक मतभेदों के कारण भाजपा संगठन पर कोई सवाल खड़ा हो। इसी वजह से उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने और नागौर चुनाव की जिम्मेदारी से मुक्त करने का अनुरोध किया। :contentReference[oaicite:9]{index=9}
धर्मेंद्र गहलोत के इस्तीफे ने अजमेर भाजपा की अंदरूनी राजनीति और आगामी नगर निगम चुनाव की रणनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
नगर निगम चुनाव में टिकट को लेकर बढ़ी हलचल
वीडियो में बताया गया कि अजमेर के 80 वार्डों के लिए कांग्रेस की ओर से बड़ी संख्या में संभावित जनप्रतिनिधियों और जनसेवकों की सूची तैयार की गई है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों प्रमुख दलों के भीतर टिकट के दावेदारों की संख्या काफी अधिक है। टिकट वितरण के साथ ही पार्टी के अंदर दावेदारी और नाराजगी का दौर भी तेज होने की संभावना है। :contentReference[oaicite:10]{index=10}
वहीं भाजपा के संदर्भ में भी वीडियो में पार्टी के भीतर संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय नेतृत्व के बीच समीकरणों की चर्चा की गई है। चुनाव से पहले संगठन के भीतर असंतोष को नियंत्रित करना दोनों दलों के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
टूटी सड़कें और नालियां बने स्थानीय मुद्दे
राजनीतिक बयानबाजी के बीच अजमेर के स्थानीय नागरिकों ने अपने वार्डों से जुड़े मूलभूत मुद्दों को भी सामने रखा। वीडियो में वार्ड 51 के स्थानीय निवासियों से बातचीत की गई, जिसमें सड़क, नाली और पानी की समस्याओं का उल्लेख सामने आया।
एक स्थानीय निवासी ने अपने वार्ड में पिछले कार्यकाल के दौरान विकास कार्यों को लेकर असंतोष जताया और नालियों में लंबे समय तक कचरा जमा रहने तथा सड़कों की खराब स्थिति की शिकायत की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विकास कार्यों को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है। :contentReference[oaicite:11]{index=11}
एक अन्य स्थानीय महिला ने भी सड़क और नालियों की खराब स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पानी की समस्या को लेकर भी स्थानीय लोगों ने संबंधित जनप्रतिनिधियों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया था। :contentReference[oaicite:12]{index=12}
क्या तीसरे मोर्चे की संभावना बनेगी?
धर्मेंद्र गहलोत के भाजपा से इस्तीफे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या उनकी राजनीतिक नाराजगी अजमेर में किसी नए राजनीतिक समीकरण या तीसरे मोर्चे की संभावना को जन्म दे सकती है। फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट राजनीतिक गठबंधन सामने नहीं आया है, लेकिन चुनावी परिस्थितियों में स्थानीय नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
आगामी नगर निगम चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने एक तरफ टिकट वितरण की चुनौती होगी तो दूसरी तरफ स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की नाराजगी को संभालने की जिम्मेदारी भी होगी।
विकास के मुद्दों पर जनता की नजर
अजमेर की चुनावी राजनीति में इस बार संगठनात्मक समीकरणों के साथ स्थानीय विकास के मुद्दे भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। सड़क, नाली, पानी और सफाई जैसी समस्याओं को लेकर स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि चुनावी बहस केवल पार्टी और उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहने वाली।
कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने-अपने स्तर पर चुनावी तैयारियों और संभावित उम्मीदवारों की तलाश में जुटे हैं। अब देखना होगा कि टिकट वितरण के बाद दोनों दलों में असंतोष किस स्तर तक सामने आता है और क्या इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ता है।
अजमेर नगर निगम चुनाव से पहले जिस तरह कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान, भाजपा में धर्मेंद्र गहलोत का इस्तीफा और स्थानीय विकास के मुद्दे एक साथ सामने आए हैं, उससे चुनावी मुकाबला दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में टिकट वितरण और राजनीतिक समीकरणों में होने वाले बदलाव पर सभी की नजर रहेगी।



