अजमेर में घरों की छतों पर टेरेस गार्डनिंग का चलन लोगों को प्रकृति से जोड़ने के साथ-साथ सुकून के पल बिताने का मौका दे रहा है। KIVY NEWS की खास रिपोर्ट में रेखा जी के खूबसूरत टेरेस गार्डन की कहानी सामने आई, जहां उन्होंने लॉकडाउन के दौरान शुरू किए गए अपने शौक को धीरे-धीरे एक हरे-भरे गार्डन में बदल दिया।
- पिता से विरासत में मिला गार्डनिंग का शौक
- लॉकडाउन में बीजों से शुरू किया सफर
- पौधों की देखभाल में खाद और कटिंग का महत्व
- किचन वेस्ट से घर पर तैयार करती हैं ऑर्गेनिक खाद
- अजमेर में पानी की कमी के बावजूद शुरुआत संभव
- कटिंग के जरिए बिना ज्यादा खर्च बढ़ाएं गार्डन
- नई पीढ़ी के लिए सोशल मीडिया भी मददगार
- लॉकडाउन का शौक बना जिंदगी का खूबसूरत हिस्सा
रेखा जी के अनुसार टेरेस गार्डन घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ मानसिक सुकून देने वाली जगह भी बन सकता है। उनका कहना है कि सुबह के समय करीब एक घंटा पौधों के बीच काम करने से मन को अच्छा महसूस होता है। उन्होंने टेरेस गार्डन को एंग्जायटी और डिप्रेशन से राहत देने में मददगार अनुभव बताया।
पिता से विरासत में मिला गार्डनिंग का शौक
रेखा जी ने बताया कि गार्डनिंग का शौक उन्हें अपने पिता से विरासत में मिला है। उनके पिता भी गार्डनिंग किया करते थे और वहीं से उन्हें पौधों को लगाने तथा उनकी देखभाल करने में रुचि पैदा हुई। इसी शौक ने आगे चलकर उनके घर की छत को एक खूबसूरत गार्डन में बदल दिया।
शुरुआत बड़े गार्डन से नहीं, दो-तीन गमलों से भी की जा सकती है।
रेखा जी
लॉकडाउन में बीजों से शुरू किया सफर
रेखा जी ने बताया कि उनके टेरेस गार्डन की शुरुआत लॉकडाउन के दौरान हुई। उस समय बाहर की गतिविधियां बंद थीं और घर पर समय बिताना चुनौतीपूर्ण हो रहा था। उन्होंने घर में मौजूद मिर्च और धनिए के बीजों से पौधे तैयार करना शुरू किया। धीरे-धीरे पौधों की संख्या बढ़ती गई और गार्डनिंग उनका नियमित शौक बन गई।
रेखा जी के मुताबिक उन्होंने शुरुआत में करीब 510 पौधों से अपना गार्डनिंग सफर शुरू किया। इसके बाद पौधों की कटिंग और लगातार देखभाल के जरिए छत पर गार्डन का विस्तार होता गया।
पौधों की देखभाल में खाद और कटिंग का महत्व
टेरेस गार्डन की देखभाल को लेकर रेखा जी ने बताया कि पौधों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित कटिंग और खाद देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पौधों में कभी-कभी मिलीबग जैसे कीड़े लग जाते हैं, जिनसे बचाव के लिए वह खाने वाले सोडे के स्प्रे में नीम का तेल मिलाकर इस्तेमाल करती हैं।
किचन वेस्ट से घर पर तैयार करती हैं ऑर्गेनिक खाद
रेखा जी बाजार से खाद खरीदने के बजाय घर पर ही ऑर्गेनिक खाद तैयार करती हैं। इसके लिए वह किचन से निकलने वाले वेस्ट को बाहर फेंकने के बजाय एक मटके में जमा करती हैं। इसमें सूखी पत्तियां और गत्ता मिलाकर खाद तैयार की जाती है। उनके अनुसार इससे पौधों के लिए अच्छी ऑर्गेनिक खाद तैयार हो जाती है।
अजमेर में पानी की कमी के बावजूद शुरुआत संभव
अजमेर में पानी की कमी को लेकर रेखा जी ने कहा कि आजकल जरूरत की कई चीजें आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। उनका सुझाव है कि जिन लोगों को टेरेस गार्डन बनाने का शौक है, वे बड़े स्तर पर शुरुआत करने के बजाय छोटे-छोटे गमलों से शुरुआत करें।
कटिंग के जरिए बिना ज्यादा खर्च बढ़ाएं गार्डन
रेखा जी के अनुसार टेरेस गार्डन को बढ़ाने के लिए हर बार बाजार से नए पौधे खरीदने की जरूरत नहीं है। पौधों से निकलने वाली कटिंग को आपस में साझा करके नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इस तरह धीरे-धीरे घर की छत पर एक बड़ा गार्डन विकसित किया जा सकता है।
नई पीढ़ी के लिए सोशल मीडिया भी मददगार
सोशल मीडिया पर टेरेस गार्डनिंग से जुड़े वीडियो और टिप्स को लेकर रेखा जी ने कहा कि नई पीढ़ी के लिए ये काफी फायदेमंद हैं। उन्होंने बताया कि वह खुद भी सोशल मीडिया से गार्डनिंग से जुड़े कई टिप्स लेती हैं और उन्हें अपने गार्डन में आजमाती हैं।
लॉकडाउन का शौक बना जिंदगी का खूबसूरत हिस्सा
रेखा जी की कहानी बताती है कि लॉकडाउन के दौरान समय बिताने के लिए शुरू किया गया एक छोटा सा प्रयास आज उनकी जिंदगी में खुशियों और सुकून का हिस्सा बन चुका है। घर की छत पर तैयार किया गया यह टेरेस गार्डन न केवल हरियाली से भरा है, बल्कि उन्हें रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से कुछ पल दूर प्रकृति के साथ बिताने का अवसर भी देता है।
टेरेस गार्डनिंग शुरू करने के इच्छुक लोगों के लिए रेखा जी का संदेश साफ है कि इसके लिए बड़ी जगह या भारी खर्च जरूरी नहीं है। कुछ गमलों से शुरुआत कर पौधों की कटिंग, घर की ऑर्गेनिक खाद और नियमित देखभाल के जरिए धीरे-धीरे अपनी छत को हरे-भरे गार्डन में बदला जा सकता है।



