अजमेर निकाय चुनाव: कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर घमासान, कई दावेदार निर्दलीय मैदान में; BJP ने 80 वार्डों में उतारे प्रत्याशी

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अजमेर नगर निगम चुनाव में नामांकन के अंतिम दिन सियासी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। भाजपा ने सभी 80 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं, जबकि कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर असमंजस और अंदरूनी खींचतान के आरोप सामने आए हैं। कई दावेदार पार्टी सिंबल की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण निर्दलीय नामांकन भी दाखिल करते नजर आए।

BJP प्रत्याशी अनिल नरवाल ने वार्ड 9 से जताया भरोसा

वार्ड नंबर 9 से भाजपा की ओर से दावेदारी कर रहे अनिल नरवाल ने बताया कि उन्हें पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने का भरोसा है। उन्होंने कहा कि वार्ड में उनके अलावा कोई अन्य प्रमुख दावेदार नहीं है और संगठन की ओर से उन्हें नामांकन दाखिल करने के लिए संकेत मिला है।

अनिल नरवाल ने भाजपा की जीत का दावा करते हुए कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विकास कार्य हो रहे हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के लिए नगर निगम में एक बार फिर भाजपा का बोर्ड बनना चाहिए।

“फिर वापस से भारतीय जनता पार्टी का कमल का फूल खिलेगा और नगर निगम के अंदर भारतीय जनता पार्टी का बोर्ड बनेगा।”

कांग्रेस दावेदारों में सिंबल को लेकर असमंजस

वार्ड नंबर 50 से कांग्रेस से जुड़े चंदन सिंह ने नामांकन दाखिल किया। उन्होंने बताया कि उस समय तक पार्टी की ओर से सिंबल मिलने की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। उनका कहना था कि नामांकन की अंतिम तारीख होने के कारण फॉर्म दाखिल करना जरूरी था और कांग्रेस से टिकट मिलने की उम्मीद बनी हुई है।

नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस के कई दावेदार इसी असमंजस में दिखाई दिए कि उन्हें पार्टी का आधिकारिक सिंबल मिलेगा या नहीं। कुछ दावेदारों ने पार्टी सिंबल नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए वैकल्पिक नामांकन फॉर्म भी जमा किए।

भाजपा से जुड़े सुनील गुर्जर ने भी निर्दलीय नामांकन किया

वार्ड नंबर 56 से सुनील गुर्जर ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर दावेदारी पेश की। बातचीत में उन्होंने खुद को भाजपा युवा मोर्चा का जिला मंत्री रह चुका बताया। उनके अनुसार पार्टी की ओर से वार्ड को लेकर पहले अलग संकेत मिले थे, लेकिन बाद में उम्मीदवार को लेकर स्थिति बदलती दिखाई दी।

सुनील गुर्जर ने कहा कि वह लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि उन्हें पार्टी की ओर से मौका नहीं दिया जाता है तो निर्दलीय चुनाव लड़ना उनके लिए उचित विकल्प है।

कांग्रेस की सूची में वार्ड 3 और 4 से उम्मीदवार नहीं

नामांकन के अंतिम दिन सामने आई स्थिति के मुताबिक कांग्रेस की सूची में वार्ड नंबर 3 और 4 से उम्मीदवार नहीं उतारे गए। वहीं तीन बार कांग्रेस के टिकट पर पार्षद रह चुके श्रवण ट्रोनी को भी इस बार टिकट नहीं मिलने की बात सामने आई।

दूसरी ओर पूर्व लोक अभियोजक रूपेंद्र कुमार परिहार को वार्ड नंबर 27 से कांग्रेस का टिकट मिलने की जानकारी दी गई। पूर्व पार्षदों में चंद्रशेखर बालोटिया, हमीद चीता, काजल यादव, रश्मि हिंगोरानी और नरद गुर्जर को भी टिकट मिलने की बात सामने आई।

वार्ड 24 से कांग्रेस की दावेदार ने टिकट मिलने का जताया भरोसा

वार्ड नंबर 24 से कांग्रेस की दावेदारी कर रही एक महिला प्रत्याशी ने बताया कि वह सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से उनका टिकट कंफर्म है और पिछले 15 वर्षों से क्षेत्र में काम करने के आधार पर उन्हें जनता का समर्थन मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने सड़क, नाली और बिजली जैसी स्थानीय समस्याओं के समाधान के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना अपनी प्राथमिकता बताया। उनका कहना है कि सरकार किसी भी पार्टी की हो, लेकिन जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।

BJP ने सभी 80 वार्डों में उतारे प्रत्याशी

निकाय चुनाव में भाजपा ने सभी 80 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। पार्टी की सूची में कई नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि कुछ पुराने चेहरों को भी दोबारा चुनाव मैदान में उतारा गया है। वार्ड नंबर 4 को चुनाव की हॉट सीटों में से एक बताया जा रहा है, जहां भाजपा ने मोनिका जैन को प्रत्याशी बनाया है।

प्रियंका चौधरी ने RLP से वार्ड 80 में ठोकी ताल

कांग्रेस की महिला प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका चौधरी को वार्ड नंबर 4 से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रत्याशी के तौर पर वार्ड नंबर 80 से चुनाव मैदान में उतरने की बात सामने आई है। इससे कांग्रेस के लिए एक और राजनीतिक चुनौती पैदा हो गई है।

प्रियंका चौधरी ने पहले कांग्रेस के भीतर टिकट प्रक्रिया और महिला कार्यकर्ताओं को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जब वह पार्टी में सक्रिय महिला कार्यकर्ता हैं और आरक्षित वार्ड से अपनी दावेदारी पेश कर चुकी हैं, तो उन्हें अवसर क्यों नहीं दिया गया।

टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी फूट के आरोप

नामांकन प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस के कई दावेदारों की ओर से पार्टी के टिकट वितरण पर नाराजगी सामने आई। कुछ दावेदारों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं दिया गया और बाहरी या नए चेहरों को प्राथमिकता दी गई।

एक कांग्रेस समर्थक दावेदार ने दावा किया कि वह करीब 22 वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उन्होंने पार्टी के निर्णय से नाराज होकर अपना प्रत्याशी मैदान में उतारने की बात कही, हालांकि जीत के बाद कांग्रेस में ही जाने की बात भी कही।

अजमेर निकाय चुनाव में निर्दलीयों की बढ़ी संख्या

नामांकन के अंतिम दिन की तस्वीर में बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी भी सामने आए। पार्टी सिंबल को लेकर असमंजस और टिकट नहीं मिलने की नाराजगी के कारण कई दावेदारों ने निर्दलीय विकल्प अपनाया। ऐसे में आने वाले चुनाव में कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने की संभावना बनती दिखाई दे रही है।

अब नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अजमेर नगर निगम चुनाव में असली मुकाबले की तस्वीर सामने आने लगी है। भाजपा सभी 80 वार्डों में प्रत्याशी उतारकर मजबूत संगठनात्मक स्थिति का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस को टिकट वितरण से उपजे असंतोष और संभावित बागियों की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

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