जन्माष्टमी के पर्व से पहले अजमेर के नया बाजार में लड्डू गोपाल की पोशाक, झूले, सिंहासन, मुकुट और श्रृंगार सामग्री की खरीदारी को लेकर रौनक बढ़ने लगी है। कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे श्रद्धालु अपने कान्हा के लिए अलग-अलग डिजाइन और फैब्रिक की पोशाकें पसंद कर रहे हैं।
बाजार में लड्डू गोपाल के लिए छोटी-छोटी मटकियां, हार, आकर्षक पोशाकें और अन्य सजावट का सामान उपलब्ध है। खरीदारी करने पहुंचे लोगों के अनुसार इस बार बाजार में पहले की तुलना में वैरायटी भी अधिक देखने को मिल रही है।
ऑनलाइन शॉपिंग का बाजार पर असर
दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन का असर पारंपरिक बाजार की भीड़ पर दिखाई दे रहा है। जन्माष्टमी से पहले जिस तरह की भीड़ की उम्मीद रहती है, उस स्तर की भीड़ बाजार में नजर नहीं आ रही है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी के साथ बाजार में आकर अलग-अलग वैरायटी, रेट और क्वालिटी को देखकर भी खरीदारी कर सकते हैं।
झूले, सिंहासन और पोशाकों की मांग
दुकानदारों के अनुसार जन्माष्टमी के दौरान झूले, सिंहासन और लड्डू गोपाल की पोशाकों की मांग हर साल बनी रहती है। इस बार ग्राहकों की मांग को देखते हुए फैंसी और लकड़ी के झूलों के साथ ऑनलाइन देखे गए डिजाइनों को कस्टमाइज करके उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
जन्माष्टमी से पहले लड्डू गोपाल की पोशाक, झूले और श्रृंगार सामग्री की खरीदारी बढ़ी।
लड्डू गोपाल की ड्रेस की सबसे ज्यादा मांग
नया बाजार स्थित भगवान वस्त्र भंडार के संचालक रोहित खत्री ने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर उनकी दुकान पर लड्डू गोपाल की ड्रेस, पगड़ी, मुकुट और माला सहित कई सामानों की बिक्री हो रही है। फिलहाल सबसे ज्यादा मांग लड्डू गोपाल की पोशाक की है। इसके अलावा झूले, सिंहासन और मालाओं की भी खरीदारी की जा रही है।
10 रुपये से शुरू हैं पोशाकों के दाम
दुकानदार के अनुसार लड्डू गोपाल की ड्रेस की शुरुआती कीमत करीब 10 रुपये से है। साइज और डिजाइन के अनुसार कीमत में अंतर आता है और 50 रुपये तथा 100 रुपये तक की पोशाकें भी उपलब्ध हैं। ग्राहक की मांग के अनुसार अलग-अलग वैरायटी मंगाई जा रही हैं।
जन्माष्टमी से पहले बाजार में रंग-बिरंगी पोशाकों, मुकुट, आभूषण और श्रृंगार सामग्री की मौजूदगी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। लोग अपने कान्हा के लिए पसंद के अनुसार पोशाक और श्रृंगार का सामान खरीदने में जुटे हैं।



