अजमेर निकाय चुनाव से पहले शहर की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। नामांकन के दूसरे दिन पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमलता गहलोत ने वार्ड नंबर 4 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया। वहीं दूसरी ओर पूर्व पार्षद ज्ञान सारसत ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान करते हुए अच्छे और ईमानदार प्रत्याशियों को समर्थन देने की बात कही है। इसी बीच वार्ड नंबर 3 से जुड़े एक वायरल वीडियो ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं।
हेमलता गहलोत ने वार्ड नंबर 4 से भरा निर्दलीय पर्चा
शनिवार को नामांकन के दूसरे दिन पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमलता गहलोत ने वार्ड नंबर 4 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके पति धर्मेंद्र गहलोत और बार एसोसिएशन के कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
हेमलता गहलोत ने कहा कि उनकी प्राथमिकता वार्ड का विकास रहेगी। उन्होंने अपने पति के पूर्व महापौर और उपसभापति के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया और चुनाव में जीत का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि वार्ड की महिलाओं का उन्हें समर्थन मिलेगा और वह क्षेत्र के विकास के लिए चुनाव मैदान में उतरी हैं।
हेमलता गहलोत ने कहा कि उनकी प्राथमिकता वार्ड का विकास है और वह चुनावी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।
ज्ञान सारसत ने चुनाव नहीं लड़ने का किया ऐलान
इसी बीच पार्षद ज्ञान सारसत का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने नगर निगम चुनाव 2026 में खुद और अपने परिवार से किसी के भी चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वार्ड नंबर 1 से उनके नाम से और वार्ड नंबर 3 से उनकी बेटी के नाम से नामांकन पत्र मंगवाए गए थे, लेकिन उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।
ज्ञान सारसत ने कहा कि उनके वार्ड के सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होने के कारण उन्होंने चुनाव मैदान से पीछे रहने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले अन्य साथियों को अवसर मिलना चाहिए।
ईमानदार प्रत्याशियों को समर्थन देने की बात
ज्ञान सारसत ने अपने समर्थकों से जुड़े रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह पार्षद नहीं रहते हुए भी अपने मतदाताओं और शुभचिंतकों के लिए काम करते रहेंगे। साथ ही चुनाव में उन्हें ऐसे प्रत्याशी सही लगेंगे जो शहर हित में सोचते हों और ईमानदारी व निष्ठा के साथ काम करने की क्षमता रखते हों, उन्हें वह अपना समर्थन और सहयोग देंगे।
उन्होंने अपने पिछले पार्षद कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उन्होंने नगर निगम से किसी प्रकार का व्यक्तिगत लाभ लेने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में उन्होंने कोई वाणिज्यिक नक्शा पास नहीं कराया और नगर निगम से मिलने वाली सुविधाओं का भी लाभ नहीं लिया।
वार्ड नंबर 3 के वायरल वीडियो ने बढ़ाई सियासी हलचल
शुक्रवार रात वार्ड नंबर 3 से जुड़ा एक और वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में पूर्व पार्षद प्रतिभा पाराशर और उनके पति अरविंद पाराशर की पूर्व पार्षद सीताराम शर्मा से बहस होती दिखाई गई। वीडियो में अरविंद पाराशर ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
वायरल वीडियो में अरविंद पाराशर ने आरोप लगाया कि प्रतिभा पाराशर के साथ जिस तरह व्यवहार किया गया, वैसा ही व्यवहार वार्ड नंबर 3 से भाजपा की संभावित उम्मीदवार बताई जा रही सीताराम शर्मा की बहू के साथ भी हो सकता है। हालांकि ये आरोप वीडियो में व्यक्त किए गए व्यक्तिगत राजनीतिक दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस subtitle से नहीं होती।
भाजपा से विरोध नहीं, लेकिन देवनानी पर नाराजगी का दावा
वीडियो में अरविंद पाराशर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से विरोध नहीं है तथा वे भाजपा के साथ रहने की बात करते हैं। हालांकि उन्होंने वासुदेव देवनानी के साथ समर्थन नहीं होने की बात कही और महिलाओं के सम्मान से जुड़ा आरोप लगाया।
वीडियो में टिकट वितरण और संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी सवाल उठाए गए। बातचीत के दौरान यह दावा किया गया कि वार्ड नंबर 3 से संबंधित उम्मीदवार का टिकट पहले से तय होने की जानकारी थी और इसी को लेकर संगठन से कारण पूछे गए।
निकाय चुनाव से पहले भाजपा के सामने चुनौती
अजमेर निकाय चुनाव से पहले सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने भाजपा की चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। नामांकन प्रक्रिया के बीच टिकट को लेकर संभावित दावेदारों और स्थानीय नेताओं की गतिविधियों पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।
एक ओर हेमलता गहलोत के निर्दलीय मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हुआ है, वहीं दूसरी ओर ज्ञान सारसत के चुनाव से दूरी बनाने और वायरल वीडियो में सामने आए आरोपों ने अजमेर की स्थानीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि नामांकन की अंतिम तारीख तक राजनीतिक दलों की ओर से कौन-कौन से उम्मीदवार मैदान में आते हैं और टिकट वितरण के बाद बगावत का यह दौर किस दिशा में जाता है।



